कम्प्यूटर क्या हैं एवं इसकी विशेषताएँ क्या हैं? (What is Computer)

दोस्तों हम  पोस्ट में जानेंगे की कम्प्यूटर  क्या हैं एवं यह कैसे कार्य करता हैं और इसकी क्या-क्या विशेषताएँ हैं 

कम्प्यूटर – कम्प्यूटर का जनक चार्ल्स बैबेज को माना जाता हैं कम्प्यूटर वस्तुतः एक अभिकलक यंत्र (प्रोग्रामेबल मशीन )हैं ,जो दिए गए तार्किक एवं गणितीय संक्रियाओं को स्वचालित  रूप से करने में सक्षम हैं यह गणितीय एवं तार्किक क्रियाओं को सटीकता से पूर्ण करता हैं कम्प्यूटर एक साथ कई कार्यवाही को अंजाम दे सकता हैं कम्प्यूटर programming भाषा की सहायता से ही उपयोगकर्ता के निर्देशों को समझता हैं कंप्यूटर शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम वर्ष 1613 में अंग्रेज लेखक ‘रिचर्ड ब्रेथबेट’ की पुस्तक में मिलता हैं 

कंप्यूटर एक आटोमेटिक इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं जो बहुत ही कम टाइम में बड़ी से बड़ी  गणना करने में सक्षम हैं पहले कंप्यूटर सिर्फ गणना करने के लिए ही बनाया गया था धीरे-धीरे कंप्यूटर को और विकसित किया गया बाद में इससे अलग अलग डिवाइस को जोड़कर इसमें कई बदलाव किये गए 

कम्प्यूटर शब्द लेटिनभाषा के शब्द   कंप्यूट से लिया गया हैं जिसका अर्थ हिंदी में होता हैं गणना करना 

कंप्यूटर का मुख्य रूप से तीन काम होते हैं पहला काम उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए निर्देश को जिसे हम इनपुट डाटा कहते हैं लेना एवं दूसरा काम data का प्रोसेसिंग करना हैं एवं प्रोसेस डाटा को यूजर को दिखाना जिसे आउटपुट कहते हैं

  • Input Data
  • Processing 
  • Output Data 

 

कंप्यूटर की पीढ़ियां – GENERATION OF COMPUTERS 

कम्प्यूटर् की मुख्यता पांच पीढ़ियां हैं जो इस प्रकार हैं 

कम्प्यूटर की पहली पीढ़ी( FIRST GENERATION  OF COMPUTER)– इस पीढ़ी के कंप्यूटर का समयकाल 1940-1956 के बीच माना जाता हैं प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में वेक्यूम  tube का इस्तेमाल किया जाता था Vecuum Tube एक नाजुक कांच का यंत्र था, जिसमे से गैस को निकल कर vecuum यानि निर्वात बनाया गया था veccum tube में electron प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए  Electrode  

होते हैं जिन्हे कम्प्यूटर में एक स्विच अथवा एम्पलीफायर के रूप में प्रयोग किया जाता था वेक्यूम ट्यूब इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को नियंत्रित एवं बढ़ा  भी सकता था इन Vecuum Tube का उपयोग गणनाओं के साथ-साथ भण्डारण एवं नियंत्रण के लिए किया जाता था 

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर आकर एवं वजन में बहुत बड़े एवं भारी होते थे, इन्हे रखने के लिए बड़े कमरे की आवश्यकता होती थी 

कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी(SECOND GENERATION OF  COMPUTER)- इस पीढ़ी के कंप्यूटर का समयकाल 1956-1963 के बीच माना जाता हैं, इस पीढ़ी के कम्प्यूटर में VECUUM TUBE के स्थान पर ट्रांज़िस्टर(Transistor) को प्रयोग में लाया गया था इसका  आविष्कार विलियम शॉकले  ने 1947 में किया था इस पीढ़ी के कम्प्यूटर में प्रथम पीढ़ी की अपेक्षा कम एनर्जी का इस्तेमाल करते थे इस जनरेशन के कम्प्यूटर आकार में छोटे, तेज और सस्ते होते थे इसमें मेमोरी के लिए मेगनेटिक टेप(magnatic tape) का उपयोग किया जाता था कंप्यूटर की इस जनरेशन का प्रयोग मुख्य रूप से nuclear पॉवर प्लांट में किया गया था इस पीढ़ी के कंप्यूटर में पहले की अपेक्षा प्रोग्रामिंग करना आसान हो गया था 

कम्प्यूटर की तीसरी पीढ़ी(THIRD GENERATION OF COMPUTER)- इस पीढ़ी के कंप्यूटर का समयकाल 1964-1971 के बीच माना गया हैं, तीसरी जनरेशन के कंप्यूटर में ट्रांज़िस्टर के स्थान पर इंटीग्रेटेड सर्किट(IC) का उपयोग  किया जाता हैं IC चिप का आविष्कार जैक किल्बी(JACK KILBY)ने 12 SEPTEMBER 1958 में किया था IC चिप एक जटिल चिप होती हैं इसमें बहुत सारे ट्रांसिस्टर को एक छोटे  से आकर के सिलिकॉन चिप पर लगाया जाता हैं जिन्हे SEMICONDUCTOR कहा जाता हैं इससे कंप्यूटर की गति  तेज हो जाती हैं क्योंकि ट्रांज़िस्टर, रजिस्टर एवं कैपेसिटर तीनो ही एक ही परिपथ में सयोजित हो जाते हैं जिससे कंप्यूटर का आकार बहुत कम हो जाता हैं और इसमें काम करने की चाल भी बढ़  जाती हैं और इसमें लाइट की भी बचत होती हैं 

स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट के कारण    इन कम्प्यूटरों की गति माइक्रो से नेनो सेकंड तक हो चुकी हैं एक ही समय में इन कम्प्यूटरों से कई अलग-अलग काम किये जा सकते हैं 

कम्प्यूटर की चौथी पीढ़ी(FOURTH GENERATION OFCOMPUTER)- इस पीढ़ी के कम्प्यूटरो में माइक्रोप्रोसेसर चिप का इस्तेमाल किया जाता हैं इस पीढ़ी के कम्प्यूटरो  का समयकाल 1971 -1980 के बीच माना जाता हैं इस जनरेशन के कम्प्यूटरो का उपयोग आज ज्यादा किया जाता हैं माइक्रोप्रोसेसर का विकास 1971 में मर्सिअन इ हफ़ द्वारा किया गया था 

इस जनरेशन के कम्प्यूटर में 0 और 1 का इस्तेमाल कंप्यूटर संचालन में किया जाता हैं जो BINARY NUMBER के नाम से जाना जाता हैं इस पीढ़ी के कंप्यूटर का उपयोग वर्त्तमान में बहुत ज्यादा किया जाने लगा हैं क्योंकि ये साइज मे बहुत छोटे होते हैं जिन्हे आप अपनी हथेली में भी लेकर उपयोग कर सकते हैं इस जनरेशन के दौरान माउस एवं अन्य डिवाइस जैसे JOY STICK आदि का विकास  किया गया  

माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम MS DOS  का प्रयोग इसी पीढ़ी में पहली बार किया गया था इसके बाद MS WINDOS OPERATING SYSTEM का उपयोग भी कंप्यूटरों  में होने लगा था जिसके कारण मल्टीमीडिया का चलन प्रारंभ हो गया इसी जनरेशन में C PROGRAMMING LANGUAGE का विकास किया गया 

आज दुनिया में दो बड़ी माइक्रोप्रोसेसर बनाने बलि कंपनियां INTEL  और AMD हैं इस पीढ़ी में उच्च गति वाले नेटवर्क LAN(LOCAL AREA NETWORK) तथा WAN(WIDE AREA NETWORK) का विकास किया गया

कंप्यूटर की पाँचवी पीढ़ी (FIFTH GENERATION OF COMPUTER ) – इस पीढ़ी  के कंप्यूटर का 

समयकाल 1980 से  अब तक माना गया हैं, कंप्यूटर की इस पीढ़ी पर अभी काम चल रहा हैं अभी यह स्पष्ट नहीं हैं की पांचवी पीढ़ी किस दिशा में जाएँगी पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर ULSI(ULTRA LARGE SCALE INTEGRATION) की टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं इस पीढ़ी के कंप्यूटर को हर क्षेत्र में में काम करने योग्य बनाया जा  हैं इस पीढ़ी के कंप्यूटर में आर्टिफीसियल इंटेलीजेंसी(ARTIFICIAL INTELL IGENCE)  पर काम चल रहा हैं इसमें स्वयं सोचने की क्षमता भी विकसित की जा रही हैं उदाहरण के लिए गूगल असिस्टेंट(GOOGLE ASSISTANT),अलेक्सा(ALEXA) आदि हैं 

इस जनरेशन के कंप्यूटर में हाई लेबल(HIGH LABEL)  प्रोग्रामिंग भाषाओ का प्रयोग किया जा रहा हैं इसको GUI (ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस) की सहायता से इसे और अधिक उन्नत बनाया जा रहा हैं ये कंप्यूटर किसी भी प्रॉब्लम को सोल्वे करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं ये नेटवर्क के माध्यम से जुड़े होते हैं इन कम्प्यूटर्स को इंसान की तरह सभी काम करने के लायक बनाया जा रहा हैं जिन्हे रोबोट कहा जाता हैं 

कम्प्यूटर की विशेषताएं- कंप्यूटर की वैसे तो बहुत सारी विशेषताएं हैं, लेकिन हम आपको इसकी कुछ बेहतरीन गतिविधियों के बारे में बताते हैं जो इस प्रकार हैं 

  • गति- कंप्यूटर एक सेकंड में लाखों करोडो गणनाये कर सकता हैं, जितना कार्य कंप्यूटर एक सेकंड में करता हैं उतना कार्य मनुष्य एक महीने में भी नहीं कर पाते हैं, कंप्यूटर के प्रोसेसर की गति को हम हर्ट्ज में मापते हैं, मौजूदा समय में कंप्यूटर नेनो सेकंड में गणनाये कर सकता हैं  
  • विशाल भण्डारण क्षमता- कंप्यूटर के बाहरी एवं आंतरिक संग्रहण माध्यमों जैसे-हार्ड डिस्क,मेगनेटिक टेप,फ्लॉपी डिस्क,सी डी रॉम आदि में बहुत सारी सूचनाओं एवं डाटा का संग्रह किया जा सकता हैं 
  • त्रुटि रहित काम- कंप्यूटर में  गणना करते वक्त किसी भी प्रकार की गलती की कोई गुंजाईस नहीं होती हैं कंप्यूटर द्वारा की गई सभी गणनाये त्रुटिरहित होती हैं अगर कंप्यूटर में प्रविष्ट किया गया डाटा सही हैं तो कंप्यूटर हमेशा त्रुटि रहित परिणाम देता हैं

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